🌐 सीमावर्ती गांवों के विकास को मिलेगी रफ्तार, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम–II पर पटना में बड़ी कार्यशाला

• सीमावर्ती गांवों के समग्र विकास पर विशेष जोर
• डेटा आधारित मॉनिटरिंग और विभागीय समन्वय पर फोकस
• सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों ने VC के माध्यम से लिया भाग
📊 प्रभावी क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग पर सरकार का फोकस
योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार द्वारा “वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम–II (VVP-II)” के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर पटना में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय के सम्मेलन कक्ष में आयोजित हुआ, जिसमें राज्य और केंद्र के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यह योजना सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र और सतत विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजना के क्रियान्वयन में बेहतर समन्वय, डेटा आधारित मॉनिटरिंग और फील्ड स्तर पर सख्त निगरानी सुनिश्चित की जाए।
विशेष सचिव, गृह विभाग श्रीमती के. एस. अनुपम ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए विभागों के बीच मजबूत तालमेल आवश्यक है और सुरक्षा व विकास के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

सशस्त्र सीमा बल (SSB) के डीआईजी श्री मुकेश कुमार ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में विकास कार्य स्थानीय समुदाय के विश्वास को मजबूत करते हैं। वहीं गृह मंत्रालय, भारत सरकार के निदेशक (VVP) श्री मनीष श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित किया और राज्यों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक श्री दीपक कुमार ने डिजिटल मॉनिटरिंग, डेटा प्रबंधन और आईटी आधारित समाधानों की भूमिका को विस्तार से बताया।

इस कार्यशाला में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और सहरसा जैसे सीमावर्ती जिलों के जिला पदाधिकारी और अन्य अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। साथ ही विभिन्न तकनीकी सत्रों में कार्यक्रम के क्रियान्वयन और मूल्यांकन पर विस्तृत चर्चा हुई।
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